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गयादेई महिला महाविद्यालय, दुर्गापुर रोड अमेठी
किसी भी राष्ट्र का सर्वांगीण विकास तभी संभव होता है जब उस देश में निवासित लोग सुशिक्षित हों। यहां यह भी कहना समीचीन होगा कि न केवल मात्रात्मक शिक्षा ही विकास की परिचायक है अपितु इसके साथ यह भी आवश्यक है कि लोग आचार, विचार एवं संस्कारों से भी सुशिक्षित हों। राजनीतिक दृष्टि से उर्वर अमेठी में यद्यपि शिक्षा संस्थानों की कमी नहीं रही है किन्तु फिर भी यह तथ्य अवलोकनीय है कि सुदूरांचल में निवासित ग्रामीण क्षेत्रों की एक बहुत बड़ी आबादी अभी भी विशेषतया उच्च शिक्षा के सोपानों तक पहुंचने में अछूती रही है। महत्वपूर्ण यह है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना एक सपना है जबकि कोई भी समाज, क्षेत्र एवं राष्ट्र तब तक समृद्ध नहीं हो सकता जब तक वहां की स्त्रियां सुशिक्षित न हों। इसी पार्श्व-पृष्ठ भूमि में जनपद-अमेठी के सुदूरांचल में स्थित गांवों की बालिकाओं को उच्च शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से इस महाविद्यालय की स्थापना पूर्व कैबिनेट मंत्री उ०प्र० शासन श्री गायत्री प्रसाद प्रजापति द्वारा अपनी माता स्व० श्रीमती गयादेई की पुण्य स्मृति में 22 सितम्बर 2013 में की गयी।
गयादेई महिला महाविद्यालय, दुर्गापुर रोड अमेठी को उ०प्र० राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 एवं 2004 में विहित प्रावधानों के आलोक में जून, 2017 में डॉ० राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद से सम्बद्धता प्रदान की गयी है। विश्वविद्यालय द्वारा महाविद्यालय को स्नातक स्तर पर कला संकाय के अन्तर्गत हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, प्राचीन इतिहास, शिक्षाशास्त्र, समाजशास्त्र एवं गृहविज्ञान विषयों में बी०ए० पाठ्यक्रम, स्नातक स्तर पर विज्ञान संकाय के अन्तर्गत भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जन्तु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान एवं गणित विषयों में बी०एस०सी० पाठ्यक्रम तथा स्नातक स्तर पर वाणिज्य संकाय के अन्तर्गत बी०काम० पाठ्यक्रम संचालित किये जाने हेतु सम्बद्धता प्रदान की गयी है। अनुशासन एवं समयबद्ध पठन-पाठन इस महाविद्यालय की अपनी विशिष्टता रही है। इसकी समय-समय पर यहाँ पधारे विद्वान मनीषियों ने मुक्त कण्ठ से प्रशंसा भी की है। महाविद्यालय प्रशासन अपनी छात्राओं से यही अपेक्षा करता है कि वे पूर्ण अनुशासनबद्ध होकर निष्ठा एवं लगन के साथ स्वाध्याय करें एवं सदाचार के नियमों का पालन करते हुए उन्नति के पथ पर सदैव अग्रसर होती रहें।
इस महाविद्यालय में उल्लेखनीय सफलता पायी है। छात्राओं के बीच खेलकूद और शिक्षणेतर गतिविधियों की सुदृढ़ परम्परा यहाँ की विशेषता रही है।
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